ब्लॉग में आपका स्वागत है

हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)

Thursday, March 14, 2013

ae dil ....ऐ दिल



दिल  का  कहा  सुन  ऐ  दिल
दिल  की  दिल  ही  है  मंजिल
तेरे  दिल  में  मेरा  दिल
मेरे  दिल  में  तेरा  दिल
दिल  की  लगी  बुझाये  बस  दिल
दिल  से  दिल न  कर  दूर  ऐ  दिल
दिल  का  कहा  सुन  ऐ  दिल
 
 4.04pm, 2/3/2013

10 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर अहसास,आभार.

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर
    कभी गर्दिशो से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ
    चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ..

    इस आस में बीती उम्र कोई हमे अपना कहे .
    अब आज के इस दौर में ये दिल भी बेगाना हुआ

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर ...
    :-)

    ReplyDelete
  4. बढ़िया प्रस्तुति-

    शुभकामनायें आदरेया-

    ReplyDelete
  5. वाह ... दिल ही दिल है आज तो ...
    आमीन ... इस दिल की जरूर सुने रब ...

    ReplyDelete
  6. बहुत खूब!


    सादर

    ReplyDelete
  7. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

    ReplyDelete

Thanks for giving your valuable time and constructive comments. I will be happy if you disclose who you are, Anonymous doesn't hold water.

आपने अपना बहुमूल्य समय दिया एवं रचनात्मक टिप्पणी दी, इसके लिए हृदय से आभार.