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ब्लॉग में आपका स्वागत है
हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.
आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)
Monday, April 5, 2010
तुम झूठे हो इस सच से क्यों भीगी हैं पलकें मेरी
जानती हूँ तुम नहीं आओगे
फिर भी मुझमें कितना इन्तजार भर गए
तुम ना होकर भी यहीं हो
ये कैसा भरम भर गए
सबने कहा कि तुम झूठे हो
मैंने कहा तुम सच हो
सबको सच्चा कर दिया
और मुझको झूठा कर गए
तुम मेरे कोई नहीं हो
पर मेरे होकर रह गए
मेरे हो गए थे तुम अगर
तो आँखों से कैसे बह गए
और ना हुए थे मेरे गर
तो यादो में कैसे ठहर गए
असमय चले आये जीवन में
समय नहीं, अब, कह गए
मैंने जितना विश्वास किया
उतना अविश्वास भर गए
हो प्रार्थना में तुम हर पल
जीवन अभिशप्त कर गए
सपनों में न आये पलभर
उठते ही कैसे चले गए
जिंदगी भर के साथ का वादा रहा
पलभर में छोड़ने को कह गए
खुश रहना ये कहते रहे
प्रीत को आंसुओं से भर गए
2:49pm, 3/4/10
फिर भी मुझमें कितना इन्तजार भर गए
तुम ना होकर भी यहीं हो
ये कैसा भरम भर गए
सबने कहा कि तुम झूठे हो
मैंने कहा तुम सच हो
सबको सच्चा कर दिया
और मुझको झूठा कर गए
तुम मेरे कोई नहीं हो
पर मेरे होकर रह गए
मेरे हो गए थे तुम अगर
तो आँखों से कैसे बह गए
और ना हुए थे मेरे गर
तो यादो में कैसे ठहर गए
असमय चले आये जीवन में
समय नहीं, अब, कह गए
मैंने जितना विश्वास किया
उतना अविश्वास भर गए
हो प्रार्थना में तुम हर पल
जीवन अभिशप्त कर गए
सपनों में न आये पलभर
उठते ही कैसे चले गए
जिंदगी भर के साथ का वादा रहा
पलभर में छोड़ने को कह गए
खुश रहना ये कहते रहे
प्रीत को आंसुओं से भर गए
2:49pm, 3/4/10
Friday, April 2, 2010
बिटिया फिर भी मेरे आँगन आना
वो चंचल खिलती कली
पलकों तले मेरे वो पली
बाहों में जब उसको भरा
दर्द सारा स्पर्श ने हरा
ममता मेरी खिल-खिल गई
मेरी लाडो जो मुझे मिल गई
आँचल में जो उसको छुपाया
माँ होने का गौरव पाया
तुतलाती वो मीठी बोली
कानों में ज्यों कोयल बोली
घुटनों पर वो तेरा चलना
ठुमकने से पायल का बजना
पहली बार वो पढने जाना
ममता का मेरे डर जाना
समय का वो बढ़ते जाना
तुझपर चिंता, प्यार लुटाना
पल-पल तेरा वो खिलना
रूप-स्निग्घ्द्ता का निखरना
बेटी से जुड़ा सत्य का आना
होगा तुझे अब पिया घर जाना
दूर कलेजे के टुकड़े का जाना
आशीर्वचन दे अश्रु छुपाना
सहना होगा मुझे, ये सब, जाना
बिटिया, फिर भी, मेरे आँगन आना
7:22pm, 2/4/10
वो दूरियां बढाने का सामान सजाते रहे
वो दूरियां बढाने का सामान सजाते रहे
हम नासमझ से फिर भी उन्हें बुलाते रहे
राहों में दीवारें वो चुनवाते रहे
मान परीक्षा हम उन्हें गिराते रहे
फूलों की बगिया को दूर हटाते रहे
सुगंध से हम खुद को बहलाते रहे
काँटों में वो पल-पल उलझाते रहे
दामन बचा हम फूल बरसाते रहे
गैरों के करीब वो जाते रहे
अपनों से दूर हम आते रहे
अपना दामन वो छुडाते रहे
वफ़ा के वादे हम निभाते रहे
12:14pm, 2/4/10
Thursday, April 1, 2010
तुम मंदिर क्या जाते हो
तुम मंदिर क्या जाते हो
तुमको क्या भगवन मिलेंगे
दर्द दिया है जो तुमने
उनकी मूरत में दिखेंगे
क़दमों में जो सर नवाओगे
तुमपर चढ़े श्रद्धा-फूल
खिलेंगे
दिए में जो लौ भरोगे
अश्रु मेरे वहां चमकेंगे
मन्त्रों का जाप करोगे
तो आहें मेरी सुनाई देंगे
श्रद्धाजल क्या चढ़ा सकोगे
मेरे रक्त-कण जब साथ बहेंगे
तुम मंदिर क्या जाते हो
तुमको क्या भगवन मिलेंगे
5:23pm, 1/4/10
उसने बेड़ियों का हार पहनाया है
दुनिया के आगे मुझे बेगाना बताया है
पलकों से जो एक-एक कर चुना है
काँटों को राह में उसने ही बिछाया है
बहने से पहले जिन आंसुओं को मैंने मिटाया है
होठों से हँसी छिनने का उसने बहाना बनाया है
हर दर्द सहकर भी उसे दुआ दी है
पर दर्द का उसने अम्बार लगाया है
वो तो उस को छलनी कर आया है
जिस सीने ने उसे दुनिया से बचाया है
मैंने तो जाने को भी कदम बढाया है
पर उसने बेड़ियों का हार पहनाया है
6:04 pm., 31/3/10
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