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Monday, April 5, 2010

मैं पगली हूँ


उसने कहा मुझसे
तुम पागल हो चुकी हो
अरे
हँसते क्या हो उस पर तुम
सच ही तो कहा उसने
मैं पगली हूँ
देखे क्या हो ऐसे तुम
हाँ!
हाँ, मैं पगली हूँ!

चाहा उसको यूँ टूटकर
क्यों चाहा
भले ही मांगी थी चाह मेरी
उसी ने
पर क्यों चाहा

जब दर्द दिए उसने
क्यों रोई
भले ही मांगे दर्द मेरे
उसी ने
पर क्यों रोई

क्यों ख़ुशी समझ गले लगाया
क्यों मुस्काई
भले ही किया मुस्कान का वादा
उसी ने
पर क्यों मुस्काई

क्यों उसका एकाकीपन बांटा
क्यों हाथ बढाया
भले ही साथ माँगा
उसी ने
पर क्यों हाथ बढाया

क्यों उसके आंसू अपनाए
क्यों गले लगाया
भले ही आंसू बहाए दामन पकड़
उसी ने
पर क्यों गले लगाया

क्यों मौत के सफ़र में चली
क्यों साथ निभाया
भले ही कहा है जीवन सूना
उसी ने
पर क्यों साथ निभाया

आज
जब जीते जी मौत देता है
तो चुप रहती हूँ
सुनो
सुनो तो
मैं हंसती हूँ
नैनों में भरे हैं आंसू
पर मैं हंसती हूँ
खूब हंसती हूँ

पर
पर दूर से सुनना
दूर से ही सुनना मेरे कहकहे
पास आओगे
तो जान जाओगे
खोखली है
खोखली है आवाज
मौत का सन्नाटा लिए
.
.
.
फिर भी
देखो तो
मैं जीती हूँ
जिसे पाया नहीं
उसे खोकर भी जीती हूँ
जब कहती हूँ
मैं तुम्हे
मुझमें जीवन नहीं
तुम भी तो कहते हो
'हट पगली'

तो
तो उसने भी तो यही कहा
तुम पागल हो चुकी हो
फिर
फिर तुम उस पर क्यों हँसते हो
ना हंसो उस पर
तुम
हृदय चीरती है
उस पर हंसती
तुम्हारी हंसी
चाहा मैंने
दर्द लिया
ख़ुशी समझी
हाथ बढाया
गले लगाया
साथ निभाया
पर ये सब तो मैंने किया
फिर क्यों कोसो उसको
ना कहो
ना कहो उसको तुम कुछ भी
मुझको कहो
मुझको कहो ना
मेरा क्या है
मैं पगली हूँ
मैं पगली हूँ
मैं
पगली
हूँ ...............


4:13pm, 5/4/10

5 comments:

  1. nice one priti....worth reading...:)

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  2. Ek Soch........... Jo Purush nahi soch kakta... wo ek woman sochti hai... is poem se anta dikhta hai.. ek man or woman ki soch ka......aapne bahut hi aasani se ek woman ke dil ki baat..... uske bhaw..... feeling or dard....... uski sahansheelta or pyar or samarpan ke saath vyakt kiye hai.....Sundar........ Bahut sundar Preeti ji.......
    Dushyant Sharma

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  3. ये पगली होना कुछ कह कर भी बहुत कुछ अनकहा कह रहा है।


    सादर

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  4. फिर भी
    देखो तो
    मैं जीती हूँ
    जिसे पाया नहीं
    उसे खोकर भी जीती हूँ...hriday sprshi aur maarmik rachna
    bahut baar padh chuka hu fir bhi jab man hota hai aur padh liya kartaa hun

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  5. dil ko chu lene wali ek aisi rachana jo kuch na kah kar bhi bahut kuch kah rahi hai badhi swikar kare pritiji

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