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Wednesday, April 30, 2014

Tinke sa Mera Pyar तिनके सा मेरा प्यार


भूल  जायेगा  कुछ  दिनों  में  जग  ये 
निशान  मिट  जायेंगे  मेरे, दिमागों  से
पर,  हमराज,  तुम्हारे  मन  मस्तिक्ष  से
अब  चाहो  भी  तो  तुम  नही  भुला  सकोगे 
जानते हो, मैंने  बेहद  प्यार  किया  है  तुमसे
वो  तरु,  तुमने  रोपा, प्रेम-जीवन  दिया  जिसे
तिनके  सा  सही  तुम्हारे  लिए  वो  नेह  सुनो  मेरे 
पर,  तुम्हारी  हृदयधारा  में  वो  तिनका  डूबेगा  कैसे
तैरता  रहेगा  अनवरत  सिंचकर  'प्रीति'   के  हृदयलहू  से
1.50pm, 23 mar, 14

13 comments:

  1. पर, तुम्हारी हृदयधारा में वो तिनका डूबेगा कैसे
    तैरता रहेगा अनवरत सिंचकर प्रीत के हृदयलहू से

    लाजवाब पंक्तियाँ।

    सादर

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01-05-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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  3. मर्मस्पर्शी !

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  4. sundar aur bhavpoorna rachna..pahali baar aapke blog par aana hua..bahut sundar prastutiyan hain aapki..bahut bahut badhai..

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  5. बहुत खूबसूरत ! हर पंक्ति मन की गहराइयों से निकली प्रतीत होती है

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  6. बहुत सुन्दर..

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  7. मन को छूते शब्‍द .... भावमय करती रचना

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  8. सुंदर शब्द रचना .....आभार

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  9. उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@मतदानकीजिए
    नयी पोस्ट@सुनो न संगेमरमर

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  10. भावमय दिल को छूती प्रीतिमय प्रस्तुति

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Thanks for giving your valuable time and constructive comments. I will be happy if you disclose who you are, Anonymous doesn't hold water.

आपने अपना बहुमूल्य समय दिया एवं रचनात्मक टिप्पणी दी, इसके लिए हृदय से आभार.