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Saturday, October 6, 2012

जिसको खोना है वो मिलता क्यूँ है


जिसको  खोना  है  वो  मिलता  क्यूँ  है
जिसको  चले  जाना  है  वो  आता  क्यूँ  है
कुछ  यादें  देने  जो  अनमोल  बन  जायें
कुछ  सीख  देने  जो  जीवन  बदल  जायें

9.45pm

 
हम  उनसे  जब  मिलते  हैं  घबराकर  नजरें  झुका  लेते  हैं 
डरते  हैं  अपना  अक्स  देख  कर  संगदिल  ना  बन  जायें 
11.07pm, 

यूँ  महफ़िल  में  तन्हाई  का  शोर  नहीं  मचाया  करते
लोग  संगदिल  हैं  खुशियों  में  साथ  निभाया  नही  करते 
11.41pm


उनके  एक  हाथ  में  बांसुरी  दूजे  में  राधा  का  हाथ  था
उनसे  वैसे तो कुञ्ज कलिन गुंजायमान  होता  था

हरपल राधा  का  साथ  होकर भी, हर पल का साथ ना था
12. 40pm19/9/2012


12 comments:

  1. बहुत सुंदर मुक्तक. खूबसूरत प्रस्तुति.

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  2. बहुत सुंदर मुक्तक.

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  3. बहुत सुंदर मुक्तक.

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  4. आज 10/10/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन....बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति

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  6. सुन्दर अभिव्यक्ति आप भी पधारो...pankajkrsah.blogspot.com पर स्वागत है

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  7. सुंदर भाव... कभी य़हां भी आना... http://www.kuldeepkikavita.blogspot.com

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  8. सुंदर और मन को भानेवाले मुक्तक...
    :-)

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  9. भाव और अभिव्यक्ति कौशल दोनो सराहनीय!

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