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Monday, October 22, 2012

कभी - kabhi


कभी  तुम  इन्तजार  में  रहे
कभी  हम  इस  पार  आए  रहे
कभी  हवाओं  ने  जुल्फें  बिखराई
कभी  इन  फिजाओं  में  बदली  लहराई
कभी  राहों  में  बहार  छाई  रही
कभी  पंखुरियां  नजरें  बचाए  रही
कभी  आईना  आपकी  आँखों  को  बनाये  रहे
कभी  आईने  में  अपनी  भूली  सूरत  खोजते  रहे

11.19pm, 22/9/2012






9 comments:

  1. जय माँ |
    शुभकामनायें ||

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  2. बहुत सुन्दर...
    :-)

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  3. आपकी पोस्ट बुधवार (24-10-2012) को चर्चा मंच पर । जरुर पधारें ।
    सूचनार्थ ।

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  4. बहुत सुन्दर...शुभकामनाएं प्रीति..

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  5. कभी आईना आपकी आँखों को बनाये रहे
    कभी आईने में अपनी भूली सूरत खोजते रहे

    ha aesa hota hai ,bahut achchhi kavita

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  6. विजयदशमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं

    बढिया, बहुत सुंदर
    क्या बात

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