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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.
आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)
Tuesday, March 19, 2013
Monday, March 18, 2013
kusumawali कुसुमावली
मुझसे
दोस्ती करो ऐ मानव
नहीं तुम्हे कष्ट दूँ मैं कोमलांगी
आते हो लिए हृदय में तांडव
दिल को मुस्कान देती है ये कुसुमावली
कभी तोड़कर सजा लेते हो मुझको
तो कभी खिन्न हाथ से नोचते पंखुरियां
तब भी सुगन्धित कर देती हूँ तुमको
मुस्कुरा कर भुला देती हूँ तुम्हारी नादानियाँ
सजाती हूँ घर, आंगन, क्यारी, फुलवारी
रंगों बू से भर देती हूँ दिल का हर कोना
मिलती रहे जगत को हर चीज न्यारी
जरुरी है इसी लिए प्रकृति के हर अंग का होना
8.44pm, 18/3/2013
नहीं तुम्हे कष्ट दूँ मैं कोमलांगी
आते हो लिए हृदय में तांडव
दिल को मुस्कान देती है ये कुसुमावली
कभी तोड़कर सजा लेते हो मुझको
तो कभी खिन्न हाथ से नोचते पंखुरियां
तब भी सुगन्धित कर देती हूँ तुमको
मुस्कुरा कर भुला देती हूँ तुम्हारी नादानियाँ
सजाती हूँ घर, आंगन, क्यारी, फुलवारी
रंगों बू से भर देती हूँ दिल का हर कोना
मिलती रहे जगत को हर चीज न्यारी
जरुरी है इसी लिए प्रकृति के हर अंग का होना
8.44pm, 18/3/2013
Saturday, March 16, 2013
fir kehte hain फिर कहते हैं
दो बड़े कर
रहे बातें
बच्चों की होती हैं दिन और रातें,
न कमाने की चिंता कोई,
न गंवाने के डर में नींद खोई.
.
.
भूले? क्या बचपन के दिन थे,
जब बोल बोलना नहीं सीखे थे,
था कितना कठिन बतलाना,
अपनी कोई परेशानी सुनना.
सिर्फ, रोकर बतलाना,
है लघु-शंका को आना.
लो पेट पर ही थपकी,
निकली, थी अब तक रुकी,
कपड़े गीले फिर कर दिए, फिर कहते हैं.
पेट को मिला आराम,
बड़े कर रहे अभी भी कोहराम.
ओह! पेट लग रहा है खाली,
देखूं सबको आँखें लिए सवाली,
अरे रोना शुरू हुआ, फिर कहते हैं.
पेट में हो रहा बहुत दर्द,
मम्मी है सोई, कहेंगे सब बेदर्द.
रोना छूटा, दूध पिलाते हैं,
उफ़ लोरी गा-गा सुलाते हैं,
रोना बंद नहीं हो रहा, फिर कहते हैं.
ये बालपन की थी कुछ परेशानी,
सोचा नहीं? क्यूँ हो रही है हैरानी?
बोलना सीखना क्या आसान था,
चलने में तो गिर कर बुरा हाल था,
संग मेरे तुतलाते हैं, साफ़ बोलो, फिर कहते हैं.
वो न छुओ, वहां न जाओ,
कुछ पूछो तो -अभी न सताओ.
ना ही पास है पैसे हमारे,
दिन-रात सुनाते हैं बातें सारे.
कितना सब हम सहते हैं,
ना अपनी मर्जी से जी सकते हैं,
मस्ती की है जिंदगी फिर कहते हैं.
5.37pm, 15/3/2013
बच्चों की होती हैं दिन और रातें,
न कमाने की चिंता कोई,
न गंवाने के डर में नींद खोई.
.
.
जब बोल बोलना नहीं सीखे थे,
था कितना कठिन बतलाना,
अपनी कोई परेशानी सुनना.
सिर्फ, रोकर बतलाना,
है लघु-शंका को आना.
लो पेट पर ही थपकी,
निकली, थी अब तक रुकी,
कपड़े गीले फिर कर दिए, फिर कहते हैं.
पेट को मिला आराम,
बड़े कर रहे अभी भी कोहराम.
ओह! पेट लग रहा है खाली,
देखूं सबको आँखें लिए सवाली,
अरे रोना शुरू हुआ, फिर कहते हैं.
पेट में हो रहा बहुत दर्द,
मम्मी है सोई, कहेंगे सब बेदर्द.
रोना छूटा, दूध पिलाते हैं,
उफ़ लोरी गा-गा सुलाते हैं,
रोना बंद नहीं हो रहा, फिर कहते हैं.
ये बालपन की थी कुछ परेशानी,
सोचा नहीं? क्यूँ हो रही है हैरानी?
बोलना सीखना क्या आसान था,
चलने में तो गिर कर बुरा हाल था,
संग मेरे तुतलाते हैं, साफ़ बोलो, फिर कहते हैं.
वो न छुओ, वहां न जाओ,
कुछ पूछो तो -अभी न सताओ.
ना ही पास है पैसे हमारे,
दिन-रात सुनाते हैं बातें सारे.
कितना सब हम सहते हैं,
ना अपनी मर्जी से जी सकते हैं,
मस्ती की है जिंदगी फिर कहते हैं.
5.37pm, 15/3/2013
Thursday, March 14, 2013
Tuesday, March 5, 2013
dil bhaar aaya hai ...दिल भर आया है
हवाओं में कोई रवानगी ही नही
खुशबू में ख़ुशी की कोई बू ही नही
समां में छाया बोझिल अँधियारा है
कोई मेरा होकर भी मेरा है नही
मन ये जानकर भी मानता है नही
दिल यूँ क्यूँ ऐसे भरम में भरमाया है
राग हूँ पर होंठों का गीत हूँ नही
हाथ थामे चलते हैं पर साथ हूँ नही
याद दिला कर अपनी मुझे भुलाया है
चांदनी हूँ श्वेत पर हृदय में शीतलता है नही
रोशनी में डूबी हूँ मन में फैला उजियारा है नही
फिर बादलों सा उमड़-घुमड़ कर दिल भर आया है
खुशबू में ख़ुशी की कोई बू ही नही
समां में छाया बोझिल अँधियारा है
कोई मेरा होकर भी मेरा है नही
मन ये जानकर भी मानता है नही
दिल यूँ क्यूँ ऐसे भरम में भरमाया है
राग हूँ पर होंठों का गीत हूँ नही
हाथ थामे चलते हैं पर साथ हूँ नही
याद दिला कर अपनी मुझे भुलाया है
चांदनी हूँ श्वेत पर हृदय में शीतलता है नही
रोशनी में डूबी हूँ मन में फैला उजियारा है नही
फिर बादलों सा उमड़-घुमड़ कर दिल भर आया है
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