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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)

Sunday, February 16, 2014

t​um ho sang to​​ तुम हो संग तो



मेरी  नसों  में  बसते  हो, तुम  तो  जानते  हो
तुमसे  विलग  हो  जाऊं, अब  भला  ये  कैसे  हो
3.43am 15 feb 14

तुम  हो  संग  तो ​ सुंदर  लगे  कुसुम  उपवन
तेरा  साथ ​​ है  तो  झुलाये  मुझे  झूमती  पवन ​

​तेरी  उंगलियां ​ खेले,  मेरी  लटों  को  उलझाये ​
​तेरी  मुस्कान  माथे  की  सलवटों  को  सुलझाए   ​

​तेरे  आँखों  की  चमक  समाई  है मेरी  बिंदिया  में ​
​तेरी  हंसी  की  मधुर  खनक  भरी  मेरी  चूड़ियों  में ​

​तेरी  छाया  को  नैनों  में  कजरा  बना  सजाया  है ​
​तेरी  चाहत  से  आज  श्रृंगार  मैंने  अनूठा  किया  है ​

​तुझे  सोच  के  ओढूँ,  शरमाती,  मैं  धानी  चुनरी ​
​ इठलाऊँ, तेरी  आँखों  में  देखूं  मैं खुद  को  संवरी ​​

​3.25 pm, 15 feb 14​

Tuesday, February 11, 2014

anmol tum अनमोल तुम

The precious can be anyone who stood by you. अनमोल वो  जो  आपके साथ दे.


तुझे आजमाना ये कभी सोचा भी नहीं
जान के कभी परीक्षा हमने ली भी नहीं

जिंदगी के झंझावत ने चहुँ ओर से आ घेरा
पर तुमने कभी भी न मुझसे अपना मुँह फेरा

हालत की आँधियों ने मुझे भरमा दिया
तुमने  हर कदम मुझे पलकों में उठा दिया

उलझनों के आज बादल मन से सारे छंट गए
जाना किस अनमोल साथ को इतना सताते रहे
11.17 pm, 10 feb 14

Thursday, February 6, 2014

mai hans rahi hun मैं हंस रही हूँ




तुम्हारी  चाहत  है  मैं  हँसूँ
देखो  ना  अब  मैं  हंस  रही  हूँ
पर  जानते  हो  ना  कुछ  कमी  है
मुस्काती  नैनों  की  चमक  वो  नही  है
फूल  कैसे  झूमे  बिन  अपने  प्रेम  भ्रमर  के
श्रृंगार  का  क्या  मोल  बिन  तेरे  सामीप्य  के
बस  अब  ना  रहना  तुम  मुझसे  यूँ  दूर  दूर  खड़े
आओ  अब  कि  मेरे  मन आँगन  में  रस  फुहार  पड़े
2.40pm, 6 feb 14

Sunday, February 2, 2014

jindgi tujhe salaam...जिन्दगी तुझे सलाम




कठिन होता है रोती आँखों से हँसना
तेरे प्यार में हमने वो भी काम किया
फूट फूट कर जब रो रहा था दिल
हमने औरों को हँसाने का काम किया

रोज दर से तेरे आंसू लिए लौट आते है हम
जाओ खाली हमने तेरे दिल का मकान किया
पर अब नहीं जी सकेंगे ऐसे बिखर के हम
लो हमने जिन्दगी अब तुझे ही सलाम किया

11.20pm, 1 feb 14

Monday, January 27, 2014

mere mitra-2 ....मेरे मितरा-2


वो  दिया  जो  प्रज्ज्वलित  हुआ  मन  में
धुंआ  धुंआ  सा  क्यूँ  कर  भर  गया  मुझमें

2.56pm, 27 jan 14


मेरे मितरा

बड़ी  जिद्दी  हो  आखिर  क्या  हासिल  इस  चुप्पी  से
बहुत  दिन  हुए  छोडो  ना  नाराजगी, कहा उसने 
सच  कहा,  कुछ  हासिल  नही,  इस  चुप्पी  से
सिवा  तड़प  के, आंसू  के,  इस  जुदाई  की  पीड़ा  के

मैं  क्या  करूँ पर,  तुम्ही  कहो 
संग  मेरे  होकर  भी  भटकते  हो
गैरों  की  राह  दिन  रैन  तकते  हो
करीब  ला  कर  बेदर्दी  से   झटकते  हो  

कहते  हो  ना  करूँ  शिकायत मैं
पींग  भरो  जब  तुम  वहाँ  झूलों  में
कि  तब  लौट  आओगे  तुम  पास  मेरे
पर  कहो  क्यूँ  है  ये  लगते  फेरे  तुम्हारे  
जब  मैं  हूँ  दिल  के  इतने  करीब  तुम्हारे


कहते  हो,  तुम  हमारे, हम  तेरे
फिर  क्यूँ  चाहते  हो,  रहे,  गैर  घेरे
देते  हैं  दर्द,  भरते  हैं  अग्नि  मेरे  दिल  में
करते  हो  यूँ  दूर  और  ना  रह  सकूँ  दूर  मैं

कहा  तुमने  मुझे  ना  कहना  क्या  कर  दिया
तुम ही  कहो  ना  मुझसे  तुमने  क्या  ना  किया
मैं  चुप  रही,  पर,  आँखों  ने  पढ़  लिया
जानते  हो  दिखा  जो, दिल  पर  क्या  किया

और क्या  चाहूंगी  मितरा  तुमसे  मैं
एक  तेरी  चाह  के  सिवा  और  क्या  है
तुमसे  दूर  या  करीब  आंसू  मिलते  हैं
तुम  ही  कहो  अब  करूँ  क्या  मितरा  मैं
ना  जी  सकूँ  ऐसे  और  जीना  भी  चाहूँ  मैं
4.14pm 24 jan 14