वो कहते थे तुम रूठे तो जहाँ रूठ जायेगा
तेरे बिना ये दीवाना पल भर न रह पायेगा
फूलों से भरा चमन वीराना नजर आएगा
सितार बजेगा तो सही सुर सजा न पायेगा
आज मेरी हँसी उसे भाती नही
बहते अश्रु अब नजर आते नहीं
कुछ पल का खेल था, बस, चाहत उसकी
लहरों सा मेल हो थी कहाँ चाहत उसकी
तस्वीर है नई आज आँखों में उसकी
नए वादों की झड़ी है बातों में उसकी
आज वो कोई नहीं है मेरा
कहता था सदा के लिए हूँ तेरा
देखो मेरी गली में क्या नजारा है
लोगों की आमद से भरा घर सारा है
एक मुस्कान को मेरी, मेरे करीब आ पुकारा है
पूछते हैं रूह कहाँ है क्यूँ भला जमीं पर उतारा है
आज तुम्हे दिखे है दूर जो उजली किरण
हो आजाद तुम, मैं, हुआ है मुक्ति से मिलन
4.55pm, 10/10/2012


