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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

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Friday, May 17, 2013

my name .... mera naam ... मेरा नाम


he erases my name
makes the page unwritten
but my mark on it will remain
remain engraved once written

3.55 pm 



मेरा  नाम  लिखा  था  जोअब   मिटाते  हो पन्नों  से
जब  मुझे  मिटाना  याद  है  तो  मुझे  कैसे  भूल  पाओगे

3.51 pm, 17 may, 2013

2 comments:

  1. सच कहा ... बस भूलने की कोशिश ही होगी ...

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आपने अपना बहुमूल्य समय दिया एवं रचनात्मक टिप्पणी दी, इसके लिए हृदय से आभार.