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Tuesday, July 10, 2012


मेरी मुस्कान में छिपे आँसू
वो अगर देख पाता और रुक जाता
आज उसकी जिंदगी की मैं बहार होती
और, मेरे मन मंदिर का वो देवता होता

3.01 pm, 29/6/2012

7 comments:

  1. बहुत बेहतरीन
    बहुत बढ़िया:-)

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  2. काश ऐसा हो पाता ... इस काश में कितना कुछ है जो नहीं हुवा ...

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