ब्लॉग में आपका स्वागत है

हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)

Thursday, April 7, 2011

हृदय को बसेरा बनाए हैं


तुम्हारे शब्द मौन, पर
मेरे
कानों में गुनगुनाते हैं
स्पर्श
ठहरे पवन मानिंद, पर
मुझे
गर्माहट से भर जाते हैं

हैं
नहीं बाहें मुझे थामे, पर
जीवन
संघर्ष में साथ ही हैं
कदम
नहीं चल रहे संग, पर
सह
-कदम चल रहे हम साथी हैं

नयनों
को है नहीं दरस, पर
नैनों
में हर क्षण समायें हैं
नहीं
हैं वो करीब मेरे, पर
हृदय को बसेरा बनाए हैं
translated on 2 April, 2011
read in English - http://prritiy.blogspot.com/2011/03/you-with-me.html

12 comments:

  1. हैं नहीं बाहें मुझे थामे, पर
    जीवन संघर्ष में साथ ही हैं
    कदम नहीं चल रहे संग, पर
    सह -कदम चल रहे हम साथी हैं

    नयनों को है नहीं दरस, पर
    नैनों में हर क्षण समायें हैं
    नहीं हैं वो करीब मेरे, पर
    ह्रदय को बसेरा बनाए हैं.....

    बहुत ही सुंदर प्रेमपगी रचना . शुभकामना.

    ReplyDelete
  2. प्रीति जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    तुम्हारे शब्द मौन,
    पर मेरे कानों में गुनगुनाते हैं
    स्पर्श ठहरे पवन मानिंद,
    पर मुझे गर्माहट से भर जाते हैं

    बहुत सुंदर भावों का चित्रण है !

    प्रेम की सरस शिष्ट अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद !
    बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं …

    * श्रीरामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं ! *

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete
  3. Appreaciate for the work you have put into this article, this helps clear up some questions I had.

    ReplyDelete
  4. मनोरम स्नेहासिक्त भावनाओं में भीगी प्रेम रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा.
    आपके ब्लौग के बारे में आज ही पता चला. आपकी अंग्रेजी कवितायेँ भी मधुर हैं.

    ReplyDelete
  5. प्रेम की बहुत ही सुंदरगी रचना ********बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं

    ReplyDelete
  6. नहीं हैं वो करीब मेरे, पर
    ह्रदय को बसेरा बनाए हैं

    बहुत सुंदर प्रीति

    ReplyDelete
  7. आदरणीय प्रीति जी
    नमस्कार !
    तुम्हारे शब्द मौन, परमेरे कानों में गुनगुनाते हैंस्पर्श ठहरे
    ..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

    ReplyDelete
  8. वाह पहली बार पढ़ा आपको बहुत अच्छा लगा.
    आप बहुत अच्छा लिखती हैं और गहरा भी.
    बधाई.

    ReplyDelete
  9. बहुत ही सुंदर रचना . शुभकामना.

    ReplyDelete
  10. एक हृदय ही तो है जहाँ बसेरा बनाने के लिए अति उपर्युक्त जगह है,जहाँ अपने प्रियतम की छवि और अहसास को संजो कर रखा जा सकता है.
    सुन्दर भावपूर्ण व अनुपम प्रस्तुति.

    ReplyDelete

Thanks for giving your valuable time and constructive comments. I will be happy if you disclose who you are, Anonymous doesn't hold water.

आपने अपना बहुमूल्य समय दिया एवं रचनात्मक टिप्पणी दी, इसके लिए हृदय से आभार.