वो इश्क ही क्या जो सफ़र न कराये
कभी दिल से गम तक होता है सफ़र
और कभी सभी ग़मों से रुखसत दिलाये
11.32pm, 28/2/2013
हमें
सबने, हमने दिल को कहा दिल न लगाना
नासमझ पर जाने कैसे तेरी बातों में
आ गया
अब न जाने हम न ये जहां इस
लगी को बुझाना
क्या कहूँ ऐ मेरे दिल अब तू गया..
तू काम से गया
3.30pm, 1/3/2013