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Sunday, November 3, 2013

kaisi diwali कैसी दीवाली





तुम नहीं तो क्या दीवाली

कहाँ मिठास मिष्ठान्न में
ना स्वाद किसी पकवान में

रुचिकर लगे ना मुझे श्रृंगार
न मन भाए कोई वस्त्र विचार

गूंजते पटाखों का लगे बस शोर
उल्लास नहीं उत्सव में किसी और

क्या झिलमिलाएंगी सजायी बिजली की लड़ियाँ
क्या टिमटिमाएँगी दीपों की अवलि की बातियाँ

तुम नहीं साथ तो चुप हैं वो सारे मधुर मंगल गीत
मनाएं त्यौहार, हों खुश कैसे, तुम बिन मेरे मनमीत
11.45pm, 2 nov, 13

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर. दीपोत्सव की मंगलकामनाएँ !!
    नई पोस्ट : कुछ भी पास नहीं है
    नई पोस्ट : दीप एक : रंग अनेक

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  2. सच है पीया बिन कैसी दिवाली ... भावपूर्ण ...

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  3. उम्दा...बहुत-बहुत बधाई...

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