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ब्लॉग में आपका स्वागत है
हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.
आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)
Friday, August 28, 2015
Tuesday, August 18, 2015
Vidambana विडम्बना
जान, सामीप्य में पीड़ा मिलना
मेरा मुँह मोड़, अश्रु लिए चलना
हर पल छिप कर उसे निहारना
उसके सामने स्वयं को छिपाना
नहीं हैं वो सोचों में प्रतीत कराना
पथ को टकटकी लगा भी देखना
क्योंकर हुआ मेरा उससे सामना
राहों का हमारी परस्पर उलझना
नियति में दूरी, हृदय का उसी पर आना
लिखी भाग ने मेरे कैसी आह विडम्बना
@Prritiy, 10.15 pm, 15 August 2015
Monday, August 10, 2015
kuchh fir bikhre pal कुछ फिर बिखरे पल
फिर बदरी छायी फिर बूँदें बरसी
फिर पपीहे ने टेर लगाई पीहू पीहू
@Prritiy, 4.05 pm, 10 August, 2015
हमारे इन नैनों में सपने उन्होंने ही जगाये थे
प्रीतिपुष्प खिला कर जो बोले हम तो पराये थे
@Prritiy, 2.58 pm, 10 August, 2015
उनका प्रेम बिकता तो कैसे भी ख़रीद लेते
वो 'प्रीति' का दगाबाजों से सौदा करने चले
@Prritiy, 2.14pm, 10 August, 2015
कितना बदनाम कर दिया प्रेम को दगा देने वालों ने
दर्द की बात चले लोग कहते हैं, प्यार किया किसी से
@Prritiy, 2.00 pm, 10 August, 2015
हमने उन्हें सर माथे पर बिठाया
पर उन्हें पंक ही रास आता आया
@prritiy, 7.36 pm, 9 August, 2015
गर मेरे अपने हाथ में होता
तो वो हाथ हाथ से न जुदा होता
यूँ न देखते रहते इन लकीरों को
आह भर कि काश वो नसीब में होता
@Prritiy, 3.45pm, 9 august, 2015
उसके जाने से जीवन रूठा
या उसका आना अभिशाप था
अब क्या करूँ इस फेर में पड़कर
उजड़ी बगिया शोलों से लिपटकर
@Prritiy, 2.32 pm, 8 august, 2015
हृदय कहता सपना उसे पाकर पूरा होता
जिसके बिना मन सदा को अधूरा हो गया
@Prritiy, 12.49 pm, 8 August, 15
सुनो ये जो बूँदें बरस रही हैं मेरे नैनो से, या कालिमा लिए नभ से
दोनों कह रही एक ही बात बारम्बार हैं कि प्रीति करी तूने एक पत्थर दिल बैरी से
@Prritiy, 12.43pm, 8 August, 15
काश तूने कभी मेरी प्रीति की गहराई को जाना होता
जान जाता मुझसे अधिक तुझे प्रेम मिल ही नहीं सकता
@Prritiy, 12.35 pm, 8 August, 15
कहना आसान होता की भुला दो जख्मों को
कैसे भूल जाएं वो टीसें जो दिन रात होती हैं
@Prritiy, 10.49pm, 3 august, 2015
Sunday, July 12, 2015
mai teri achhai मैं तेरी अच्छाई
मैं तेरे जीवन की अच्छाई हूँ
जो तुझमें बहुत गहरे समाई हूँ
हर कदम तेरे साथ साथ होती हूँ
कभी ओझल तो कभी दिखती हूँ
जहाँ बहकते भटकते कदम तेरे हैं
शब्द सच का दर्पण दिखाते आए हैं
तुझपे कई बार बैरियों ने घेरे बनाये हैं
साथ मेरे समर्थन भरे वाक्यों ने दिये हैं
पर अब तुझे अधिक भाने लगा है
जो कुछ भी यहाँ गन्दा काला मैला है
अब ना मेरी यहाँ कोई आवश्यकता है
सदैव के लिए विदा लगता यही भला है
9.30 am, 12 july, 2015
mai tere jeevan ki achhai hun
jo tujhmein bahut gehre samai hun
har kadam tere saath saath hoti hun
kabhi ojhal to kabhi dikhti hun
jahan behkate bhatakte kadam tere hain
shabd sach ka darpan dikhate aaye hain
tujhpe kai baar bairiyon ne bhere banaye hain
saath mere samarthan bhare vakyon ne diye hain
par ab tujhe adhik bhane laga hai
jo kuchh bhi yahan ganda kala maila hai
ab na meri yahan koi aavshyakta hai
sadaiv ke liye vida lagta yahi bhala hai
Tuesday, July 7, 2015
kyun pyar क्यों प्यार
वो कहते मुझसे क्यों इतना प्रेम है
सब कहते क्यों उससे इतना प्यार है
व्यथित पूछूँ प्रेमदेव से क्यों इतनी प्रीत है
क्या कहूँ मैं तो नहीं जानूं इसका उत्तर
पूछूँ तुमसे इस जगसे मुझे दे दो प्रत्युत्तर
क्यों नेह कर हुई नजरों में तुम्हारी कमतर
क्यों हृदय को है इतनी उनकी लगन
वो तो हैं जीवन की रंगीनियों में मगन
क्यों भर गयी स्नेह भरे जीवन में अगन
चित्कार करता मन क्यों इतनी वेदना है
असहनीय अब पीड़ा में इस तरह जीना है
छलकती प्रणय पीर नीर से भरी नेत्र गागर है
व्यथित हो पूछूँ तुमने फैलाया वो मायाजाल
किस कदर उलझ गयी मैं हो गयी देखो बेहाल
तुम ही कहो ना क्यों तुम्हारी 'प्रीति' में मेरा ये हाल
@prritiy, 10.47 pm, 5 july 2015
पूछूँ तुमसे इस जगसे मुझे दे दो प्रत्युत्तर
क्यों नेह कर हुई नजरों में तुम्हारी कमतर
क्यों हृदय को है इतनी उनकी लगन
वो तो हैं जीवन की रंगीनियों में मगन
क्यों भर गयी स्नेह भरे जीवन में अगन
चित्कार करता मन क्यों इतनी वेदना है
असहनीय अब पीड़ा में इस तरह जीना है
छलकती प्रणय पीर नीर से भरी नेत्र गागर है
व्यथित हो पूछूँ तुमने फैलाया वो मायाजाल
किस कदर उलझ गयी मैं हो गयी देखो बेहाल
तुम ही कहो ना क्यों तुम्हारी 'प्रीति' में मेरा ये हाल
@prritiy, 10.47 pm, 5 july 2015
Thursday, May 14, 2015
toota dil टूटा दिल
काश ये जिंदगी खत्म हो गई होती ये जुदाई न होती.....
तो लिखते लिखते ये झुकी हुई पलकें यूँ भीगी न होती.....
@prritity 6.52pm, 11 may, 2015
तेरे रोज के प्रपंच मेरे इन रिसते घावों को हरा रखते है
न बदलेगा अभिघातों का चलन हृदय को आँखें दिखाती हैं
11.52am, 11 may 2015
कभी तो वो हमारे हुए होते तो हमें यूँ न खोते
कभी तो हमारी कद्र को माना होता तो नहीं खोते .. नहीं खोते ....
@prritity 2.21pm, 11 may, 2015
उसने हमें संभाला कहने को बड़े जातां से
फिर यूँ टुकड़े किये कि रह गए बिखरे -बिखरे से
@prritiy 1.13pm, 11 may, 2015
होता यही है मोहब्बत के जहाँ में
बुझाता वही है जलता दिल जिसके प्यार में
@prritiy, 5.31pm, 7 may, 2015
वो तो पल भर में तोड़ गए हर रिश्ता
जैसे कोई बोझ पटक दिया हो जमीं पर
@prritiy, 11.58am, 7 may, 2015
ऐसे टूट कर बिखरे हैं दिल के आईने के शीशे
हर इक टुकड़ा नश्तर सा मुझे चुभता है रात दिन
@prritiy 10.24pm, 6 may, 2015
Kaash ye jindagi khatam ho gai hoti ye judai na hoti.....
To likhte likhte ye jhuki hui palkein yun bheegi na hoti.....
@prritity 6.52pm, 11 may, 2015
Tere roj ke prapanch mere in riste ghaavon ko hara rakhte hai
Na badelega tere abhighaton ka chalan hriday ko aankhein dikhati hain
11.52am, 11 may 2015
kabhi to vo hamare hue hote to hame yun na khote
kabhi to hamari kadr ko mana hota to nahi khote.. nahi khote....
@prritity 2.21pm, 11 may, 2015
usne hame sambhala kehne ko bade jatan se
fir yun tukde kiye ki reh gaye bikhre-bikhre se
@prritiy 1.13pm, 11 may, 2015
hota yahi hai mohabbat ke jahan mein
bujhata vahi hai jalta dil jiske pyar mein
@prritiy, 5.31pm, 7 may, 2015
vo to pal bhar mein tod gaye har rishta
jaise koi bojh patak diya ho jameen par
@prritiy, 11.58am, 7 may, 2015
aise toot kar bikhre hain dil ke aaine ke sheeshe
har ik tukda nashtar sa mujhe chubta hai raat din
@prritiy 10.24pm, 6 may, 2015
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