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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

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Sunday, August 26, 2012

heartfelt thanks सस्नेह आभार



11201 steps we walked together, heartfelt thanks

मिलता  रहे  यूँ  स्नेह  बारम्बार 
11201 कदम  साथ  चले  आभार 

हमने  जब  चाहा  टूट  कर  चाहा  सच  है  ये  भी 
पर  तुमसे    तब  कह  पाए    कह  पाएंगे  कभी [2.30pm]

तुम  कर  लो  मुझसे  मेरी  ही  शिकायत 
  कहूँगी  कभी,  है  बेजा  तेरी  ये  शिकायत [3.18pm] 

मेरी  खामोशियों  को  तुमने,  सच,  है  जाना 
मैं  जानूं  और  तुम  भी,  पर  दोनों  ने  ना  माना [3.35pm] 

वो  कहते  हैं  तुमको  मोहबत  हो  ही  नही  सकती 
भूलते   हैं  उनकी  मोहब्बत  तो  हमसे  रोशन  है  होती [11.29pm] 

हम  तो  दूर  रहकर  भी  तेरे  साथ  हैं 
तेरे  छिले  क़दमों  तले सदा  मेरे  हाथ  हैं [ 11.41pm] 

  कुछ  कह  पाऊँ  तेरी  मोहब्बत  की  तहरीर  पर 
अश्क  हैं  कि  रुकते  नहीं,  होंठ  हैं  कि  हिलते  नहीं [11.49pm] 
25/8/2012

Saturday, August 25, 2012

तुम छू लेते हो--Tum Chhoo lete ho


जब रातों में चाँदी बिखरी होती है
रात की रानी पुष्पित निखरी होती है
तरुवर शांत शीश झुकाए होते है
डालियों की नीड़ में पंछी मौन होते है
मन्द बयार बन तुम छू लेते हो

भोर लालिमायुक्त होती है
पत्तियाँ ओस से झिलमिलाती हैं
कलियाँ प्रस्फुटित हो मुस्काती हैं
मंत्रोचारण, अजान पवित्रता भर देते हैं
मेरे  हृदय  को प्रार्थना बन छू लेते हो

पर्वतशिखा रोशनी में चमकती हैं
तितलियाँ फूलों में मँडराती हैं
मछली नदी में जलक्रीड़ा करती है
नीरयुक्त बदली गगन में विचरती है
नयनों को चमक बन छू लेते हो

दिवस रात्री से मिलन करती है
कलरव करती खगटोली लौटती है
ममतामयी माँ शावक से लिपटती है
रम्य संध्या प्रीत जगाती है
मेरे होठों को मुस्कान बन छू लेते हो 

Tuesday, August 14, 2012

कैसा था तुम्हारा प्यार



कैसा  था  तुम्हारा   प्यार 
जहाँ   मिलन  से  पहले  ही  जुदाई  थी 
दरिया  में  बहाने  कागज  की  नाव  बनाई  थी 
भरने  से  पहले  सूनी  करनी  कलाई  थी 
सोलह  श्रृंगार  की  जगह  जोगन  बनने  की  दुहाई  थी 
सपने  देखो  ठीक  सच  होने  की  मनाही  थी 
अपना  बनाया  तो  ना,   रूठने  की  सौं  दिलाई  थी 

कैसा  था  तुम्हारा  प्यार 
कहता  सपनों  की  परी   हो  पर  सपनों  में  रहो 
अपनों  से  भी  करीब  हो  पर  सदा  जुदा  रहो 
  छू  पाए  साया  कोई  तुम्हारा  पर  मुझसे  भी  दूर  रहो 

कैसा  है  तुमसे  प्यार 
कि बिसरा  देना  चाहूँ  पर   भूल  ना  पाऊँ 
सोचूं    तुमसे  मिलूं, बिन  देखे  रह  ना  पाऊँ 
जंगल  हो  या  मंगल  तुम्हे  बिसरा  ना  पाऊँ 
जाना  है  दूर  मुझको  सोचूं  तुम्हे  रुला  ना  जाऊं 
हो  कुछ  ऐसा    याद  करूँ  और  तुम्हे   याद  ना  आऊँ 
  तुम  कभी  कहो    मैं  ही  कभी  कह  पाऊँ 
कैसा  था  तुम्हारा  प्यार 
2.36pm, 25/7/2012



Thursday, August 2, 2012

friendship flourishes



 free from frauds
fidelity, fertile field
faith feeds feelings
forgets flaws, frictions
frustrations feeble
face flaws firmly
flaunt fervent fondness
forgive fallible, faults
fortitude flees fright
furthers fair fellowship
fences fragile frames
freshened fervor fares
footing, fragile forms
fulfills fancies, frolics
floral flames fruits
friendship flourishes

 5 pm, 17//2012

Wednesday, July 25, 2012

अबकी



मैंने  दिवास्वप्न  में  प्रीति  के  दिए  जलाये  हैं 
अबकी  बहार  को  मेरा  आँगन  सजाना  ही   है 


मनभावन  रंगों  से स्वप्न  रंगोली  बनानी  है 
कि  मुस्काए,  आहा   रंगों  से  भरा  जीवन  है 

राहों  को  सुगन्धित पुष्पों   से  सजाया   है 
आए  वो  बहार  तो  कहे  यहीं  का  हो  रहना  है 

तारों  से  सजा, उजली  उनकी  राह  करनी  है 
वो  कहें  मिट  गया  मन  का  सारा  अँधियारा  है (11.52pm, 15/7/2012)

पत्रों  की  हरीतिमा  को  जतन  से  लगाया  है 
कि  मन  सदा  कहे  जीवन  में  बसी  हरियाली  है 

स्व  को  किया उनकी  चरणों  का  आधार  है 
कि  वो  सोचें 'प्रीति' बिना  कैसे  कदम  बढ़ाना  है 
2.44pm, 19/7/2012



Saturday, July 21, 2012

हासिल होता है



कोशिशें करें  तो  हासिल  सब  होता  है 
कहते  हैं  खुदा  भी  तब  संग  होता  है 
तोड़ना  न  चाहे  कोई  मान  लिया  जाये 
पर  जुड़े  रहने  का  भी  तो  जतन  होता  है 
माना  कहा  दिलरुबा  ने  न  रूठेंगे  तुमसे 
पर  रूठ  जाने  का  भी  कुछ  सबब  होता  है 
दिलबर  दिल  में  रहबर  बन  रहे  तो  चाँद  रोशन 
वरना  बदली  छाये, चांदनी  जाये  तो  क्या  होता  है 
राहें  मोड़कर  हमसफ़र  ने  मंजिल  का  पता  बदला 
उनसे  अब  रूठकर  भी  प्रीति  को  हासिल  क्या  होता  है 
चट्टानों  के  दिल  से  भी  झरना  बहा  है 
कोशिशें  करें  तो  हासिल  सब  होता  है 
12.37pm, 21//2012