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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.
आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)
Sunday, April 22, 2012
Thursday, April 19, 2012
बीता कल, आने वाला कल
जिस कमी ने अतीत में दूरी कर दी
उसी के आधिक्य से फिर दूरी कर दोगे?
वो सपना जो बिखर गया, कैसी बेबसी थी
आज मुद्रा के दंभ में वही कहानी दोहरा दोगे?
वो पत्र जिन्हें एकाकी होने पर तब नष्ट किये
वैसे ही अब के लेख अंधियारे में बैठ मिटाओगे?
पुराने घावों की टीसों ने कितने दिवस काले किये
ये दर्द देकर जो पाओगे जीवन फिर वैसे बिताओगे ?
उन हाथों की हिना में रच गया कोई दूजा नाम
अब भी हथेलियों की लाली में दूसरा नाम सजने दोगे?
गए उस वक़्त ने, ठोकरों से घबरा, लिया मुड़ने का नाम
ये घड़ी जो बीती, बहते नीर भांति, सदा के लिए गवां दोगे?
2.19pm, 16/4/2012
Monday, April 9, 2012
मैं तेरी प्रतिबिम्ब
मैं तेरी प्रतिबिम्ब हूँ
अपनी छवि निहार ले
मेरी मुस्कान है कहती
जीवन तुम ही तो लाये
बोलती नुपुर की रुनझुन
गति तुझसे क़दमों में
चूड़ी की खनक से, मानो,
बाहें सबल तेरे बल से
उड़ते गेसू लहरा-लहरा
उड़ान भरी तुमसे दिल ने
झिलमिलाते नैन सुनो कहें
सपने भरे रंगीन तुमने
रंगों से भरी जो मैं
वो हैं रंग भरे तुमने
दर्पण कहे, हो अच्छे तुम
वही अच्छाई झलके मुझमें
1.28am, 7 april 2012
Monday, February 27, 2012
जिंदगी मिलती है?
छोडूँ मैं या छोडो तुम, दोनों ही हाथ छूटते हैं
जाऊँ मैं या जाओ तुम, दोनों के ख्वाब टूटते हैं
आगे बढूँ मैं, बढ़ो आगे तुम, दोनों ही कदम जुड़ते हैं
हाथ बढाऊँ मैं और बढाओ तुम, तब ही हाथ जुड़ते हैं
कुछ बोलूं मैं, कुछ बोलो तुम, चुप्पी तभी टूटती है
कुछ सुलझुं मैं, कुछ सुलझो तुम, उलझन तभी छूटती है
जो रूठूं मैं और रूठ जाओ तुम, किस्मत तभी रूठती है
जुदा रहूँ मैं और जुदा रहो जो तुम, दुनिया तभी लूटती है
आगे बढूँ मैं, बढ़ो आगे तुम, दोनों ही कदम जुड़ते हैं
हाथ बढाऊँ मैं और बढाओ तुम, तब ही हाथ जुड़ते हैं
कुछ बोलूं मैं, कुछ बोलो तुम, चुप्पी तभी टूटती है
कुछ सुलझुं मैं, कुछ सुलझो तुम, उलझन तभी छूटती है
जो रूठूं मैं और रूठ जाओ तुम, किस्मत तभी रूठती है
जुदा रहूँ मैं और जुदा रहो जो तुम, दुनिया तभी लूटती है
मुस्कुराऊँ मैं,
मुस्कुराओ तुम,
मोहब्बत फिर खिलती है
तुम्हारी बनूँ मैं और मेरे बनो तुम, जिंदगी फिर मिलती है
तुम्हारी बनूँ मैं और मेरे बनो तुम, जिंदगी फिर मिलती है
3.43pm 26/2/2012
Thursday, February 23, 2012
Bounded
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Set you free
But myself?
How to set ‘me’ free
Free of ‘love’ for you
stifling the hopes.
But to free myself….
Hope! Hopes against hope
Let you go,
to take your hand away.
But me, still waiting….
Staring, my hand in disbelief.
Close your heart,
ignore my pain.
But my heart ripped….
Bleeding, writhing for you.
Set you free
But
How to set ‘me’ free
12.44pm, 23/2/2012
मुक्त किया मैंने
लो अपना बंधन हटा मुक्त किया मैंने
कह तो दिया, तुम्हे, मेरे बाँवरे मन ने
कभी न मिलेगी आजादी इस दिल को
पगली तो चाहे है, हरपल बस तुम्ही को
भर लिया है इन्तजार हर पल का
अब, अब आएगा संदेसा मेरे नाम का
द्वार को, बेचैन मेरी अँखियाँ, तकती हैं
नाम तेरा ले अब भी सांसें मेरी चलती हैं
आस मेरी टूटकर भी नहीं है टूटती
विश्वास की चांदनी जरा भी न घटती
कहता है मन, प्रियतम मेरे, तुम आओगे
मेरा नेह दिल से तुम भी न भुला पाओगे
रोते नैन भी तब मुस्कुरा देते हैं
ओंठ मेरे जब भी नाम तेरा लेते हैं
तेरे नाम की बिंदिया सजा लेती हूँ
दर्द को आँखों का कजरा बना लेती हूँ
आजाद किया तुमको, ओ प्रिय मेरे
कि लौट आओ, बनके, अब बस मेरे
लेंगे हम मिलकर, जीवन के, हर फेरे
मैं सदा रहूँ तुम्हारी, तुम रहो सदा मेरे
4.13pm, 22/2/2012
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