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हृदय के उदगारों को शब्द रूप प्रदान करना शायद हृदय की ही आवश्यकता है.

आप मेरी शक्ति स्रोत, प्रेरणा हैं .... You are my strength, inspiration :)

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Sunday, November 21, 2010

me --- ‘The Perfect’?


when I see with your eyes

there is no limit in the skies

my wings shiny, soft yet strong

none of the steps ever get wrong


angels stand ever on guard

for lips to smile never is hard

fairies slightly touch here and there

from within joy radiates everywhere


having a grace now, my walk

enchanting and soft, my talk

eyes have a mesmerizing twinkle

face glistens belying any wrinkle


when in your arms I live in

world is beautiful to live, in

actions turn out to be perfect

you make me feel ‘The Perfect’



5:48pm, 6/6/10

Tuesday, March 23, 2010

मै तुम्हारी प्रीत सखे


मैं हूँ पुष्प नाजुक, कोमल
स्नेह स्पर्श आकांक्षी हर पल 
छुअन रखना कोमल अपनी 
बिखर ना जाये जीवन पंखुरी

हूँ लता छुईमुई बलखाती 

स्पर्श से तेरे जीवन पाती 
सहारा रखना सबल अपना 
टूट ना जाये कमर-तना

हूँ पंछी
मैं चंचल, चपल
स्नेह्दाना चुगती पलपल
नीड़ आश्रय रखना संभाले 
कर देना ना आंधी हवाले
 
मैं तुम्हारी प्रीत सखे 
जीवन बस तुझमें दिखे 
नेह चांदनी बरसाए रखना 
बन जाये ना जीवन सपना

12:58, 21/3/10

Saturday, February 13, 2010

तुम हो




आजकल मेरे गीतों में बस तुम हो
 सूरज की लाली, चंदा की चांदनी तुम हो
 मेरे गेसू उड़ाते पवन के झोंकों में तुम हो
 वेणी पर सजा पुष्पहार बस तुम हो


माथे पर सजी बिंदिया तुम हो

 नजरों से बचाता कजरा तुम हो
 होठों पर छाई सुर्खी तुम हो
 छलक पड़ती जो बूंदें तुम हो

हृदय का मधुर स्पंदन तुम हो

 नैनो में तैरते स्वप्न तुम हो
 विरह वर्षा फुहार तुम हो
 मेघों का अंधकार तुम हो

टूटा हर स्वप्न, वचन तुम हो

गीतों में छिपा क्रंदन तुम हो
मैंने जिसे खोया तुम हो
मुझे जिसने खोया तुम हो
9:18 p.m., 13 feb, 10.


मै रोती नहीं


जानते हो मैं रोती नहीं
मेरे आंसू तुम्हे रुसवा ना करे कहीं
पूछ ना बैठे कोई, देख उदास मेरा चेहरा
तेरे लिए की दुआओं पर, ना लगे पहरा


मैं सजती-संवरती भी हूँ
पायल, चूड़ी पहनती भी हूँ
जाने ना सच मनजोगन का
कहे ना तू भी रह अब जोगी सा

फूलों संग बातें भी करती हूँ
हवा सी उड़ती फिरती हूँ
जान मेरे रुके क़दमों की सच्चाई
दे ना कोई तुझे रुकने की दुहाई

दिए की बाती में श्रद्धा लौ भरती हूँ'
अभिषेक, तिलक, कर श्लोक पढ़ती हूँ
डूबी हूँ
मैं जिस सूने अंधकार में
भर ना दे वो कहीं तेरे संसार में


पर जब आती हूँ अपने पास
लिए बिखरी हुई टूटी आस
सारे छद्मों को फिर
मैं भूलकर
हो जाती हूँ बस तेरी होकर

श्लोक सारे भूल जाती हूँ
दीप सारे बुझा देती हूँ
हवा पर द्वार बंद कर देती हूँ
खुश्बुओं से नाता तोड़ देती हूँ

मन जोगन को जीने देती हूँ
श्रृंगार सब नोच लेती हूँ
चेहरा हाथों में छिपा लेती हूँ
जानते हो
मैं बहुत रोती हूँ 
6:56p.m., 13 feb, 10

Thursday, February 11, 2010

कैसे निशब्द बुलाऊँ


क्यों आते हो मेरे पास, जीवन की आस लिए
जब किये है मेरी साँस, अंत का वरण किये

छाया है पतझड़ अनंत, अब छाया कैसे करूँ
कोंपल बिन शाख ना जिवंत, फलपात्र कैसे भरूँ

श्वेत मेघ सा निष्फल भटकन, जलवृष्टि कैसे सोचूं

बंजर बनी मैं धरती, कण-कण, हरयाली को कैसे सोचूं

त्याग गए तुम, स्वयं, खिवैया, पार किसी को क्या लगाऊँ
स्व को तुमने बहरा किया, फिर कैसे निशब्द बुलाऊँ

बगिया, बन गई जब वन, क्या किसी को राह सुझाऊँ
पानी सा बह गया जीवन, क्या जीवन-दर्शन समझाऊँ
12:23 a.m., 23 jan, 10

Tuesday, February 9, 2010

i could sleep!

Waves rising and falling
Dreams awake yet dreaming
You gave words to feeling
Real life started weaving

Ready to pick all the thorns
Give my falling legs, the arms
Resisting all fairy charms
Gave me the strong arms

Believing your eyes, I rose
Defying the world, I chose
Time brought us too close
Left nothing for me to pose

How did then the venom creep?
Leaving nothing even to weep!
All the memories could you sweep?
Peacefully in His arms I could sleep!

5:13 p.m., 9 feb, 2010

standstill


5:26 p.m., 9 feb, 10

पुष्पित जीवन रहे, कहे क्षत प्राण!

उस रात जो सूरज डूबा
भान था 'कल' है ग्रहण
रात ही लग गया ग्रहण
उस रिश्ते का सूरज डूबा


यूं ही रोंप लिया था पौधा
मैंने अपने मन-आँगन में
आन बसा हर धड़कन में
यूं गहरे पैठ लिया था पौधा

देने शक्ति उस जीवन को
मैं, हो रही, निर्जला
स्नेह्भूमि ना रही निर्जला
किया स्वीकार उस जीवन को

सुशोभित पुष्पित तरुवर वो
पुष्पित लता छू भर, बैठी
आह! ये क्या कर बैठी
कांटे उगा गया तरुवर वो

 
काया भीतर रक्त-रंजित क्षत प्राण
क्या तोडा, है तुमको भान?
क्या खोया, है तुमको भान?
पुष्पित जीवन रहे, कहे क्षत प्राण!
11.23 p.m.; 23 jan, 2010.


Tuesday, June 10, 2008

My Love!




I don't say, I will die for you
But, I will say, I will live
To at least bring, a smile to your lips.


I may sometimes, forget things
But, everything of you, for you and
By you, will be a thing of great concern.


I am liable to be impatient at times
But, will always try to
Hear you, with all the patience.


I don't say, for you, I will bring stars from the sky
But, will try
To brighten your life, with cheers.


I can't say, life will always bring happiness
But, promise to be there, to dry your tears,
Help you, hold you in arms and to share.


I may not proclaim my love, over and over again
But my smile, concern, patience, cheers
And sharing, will tell you subtly, that
I always care for you.